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सामूहिक विवाह में जोड़ों को दिए टायलेट, एक जोड़े की रोकी शादी तो लोगों ने चंदाकर उसी दिन कराई शादी

by Som Sahu December 15, 2017  घटनाक्रम 354

जायसवाल समाज के सामूहिक विवाह में विजातीय युवती से शादी की इजाजत नहीं मिली

नव-विवाहित दंपति को उपहार के तौर पर गृहस्थी के सामान के साथ टायलेट्स भी दी गई 

इलाहाबाद।

जायसवाल समाज की ओर से यहां आयोजित सामूहिक विवाह समारोह नवविवाहितों को उपहार में शौचालय दिये जाने को लेकर सुर्खियों में रहा। इसका खूब सराहना भी हुई। लेकिन, यह आयोजन एक अन्य कारणों से भी सुर्खियों में आ गया। दरअसल सामूहिक विवाह में एक स्वजातीय युवक की शादी कराने से इसलिए इनकार कर दिया गया, क्योंकि युवती  जायसवाल नहीं थी। बाद में युवती की शादी उसके मोहल्ले के लोगों ने आपस में पैसे एकत्र कर उसी दिन कराई।

केएन काटजू कॉलेज में रविवार, 10 दिसंबर को आयोजित इस कार्यक्रम में 18 जोड़ों की शादी होनी थी। इनमें एक कौशल जायसवाल भी था। दोपहर को इन सभी दूल्हों की सामूहिक बारात निकाली जा रही थी, और इधर आयोजन स्थल पर दुल्हन पक्ष के लोग जुटे थे। इनमें एक ज्योति प्रकाश गौर भी थे जिनकी बेटी मधु की शादी कौशल से होनी थी। इसी दौरान आयोजकों की ओर से ज्योति को बताया जाता है कि उनकी बेटी का विवाह इस आयोजन में नहीं कराया जा सकता। यह सुनकर अखबार बेचकर परिवार पालने वाले ज्योति प्रकाश गौर के पांव तले जमीन खिसक गई। ज्योति और मधु के अलावा सभी परिवारीजन हताश लौट आए। इसका पता चलने पर ज्योति के मोहल्लेवाले उनकी मदद को आगे आए और कौशल व मधु की शादी उसी दिन करा दी।

सामूहिक विवाह आयोजन के संयोजक टीएन जायसवाल का कहना है कि सभी 18 कपल्स को पंजीकरण नंबर दिया था। यह विवाह समारोह केवल जायसवाल समाज के लोगों के लिए था और इसलिए ज्योति प्रकाश गौर को अपनी बेटी की शादी सामूहिक विवाह में करने की अनुमति नहीं दी गई। वहीं दूल्हा कौशल जायसवाल का कहना है कि आयोजकों को पहले ही बता दिया था कि वधु पक्ष जायसवाल नहीं है।

हालांकि स्वभाविक तौर पर स्वजातीय सामूहिक विवाहों मे उस जाति के जोड़ों का ही विवाह कराया जाता है, लेकिन यदि 18 जोड़ों की शादी के इंतजाम में 17 जोड़ों की ही शादी हुई थी तो ऐसे में यदि एक गरीब युवती, जो स्वजातीय नहीं है लेकिन जायसवाल युवक से उसका विवाह हो रहा है, की शादी भी सामूहिक विवाह में हो जाती तो कोई हर्ज क्या था। यदि ऐसा होता, तो आयोजकों को एक आदर्श स्थापित करने का श्रेय भी मिल जाता।

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