कासगंज में फैली हिंसा की आग को भड़काने में उपद्रवियों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। एक युवक की मौत की झूठी अफवाह उड़ाकर माहौल गरमाने की कोशिश हो रही थी। अफवाहों को रोकने के लिए प्रशासन को इंटरनेट सेवा बंद करनी पड़ी। इसके बाद खुराफातियों की धरपकड़ शुरू हुई।
मंगलवार को मीडिया के सामने आए राहुल उपाध्याय ने बताया कि उन्हें उनके एक दोस्त ने सूचना दी कि सोशल मीडिया पर ये अफवाह फैलाई जा रही है कि कासगंज की हिंसा में उनकी मौत हो गई है। राहुल ने कहा कि सच तो ये है कि जिस समय कासगंज में उपद्रव हो रहा था तब वो यहां मौजूद ही नहीं थे। वे उस समय अपने गांव में थे।










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