January 11, 2026
शिवहरे वाणी, D-30, न्यू आगरा, आगरा-282005 [भारत]
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ससुराल क्यों होता गेंदा के फूल की तरह…आइये जानें गंगाराम शिवहरे की दास्तान

सोम साहू
हिंदू धर्म में पूजा अर्चना और मांगलिक कार्यों में शुभ के प्रतीक गेंदे के फूल की एक ऐसी खास बात है जो किसी अन्य फूल में नहीं होती। गेंदे का फूल दरअसल एक फूल न होकर फूलों का गुच्छा होता है। गेंदे की हर पत्ती एक फूल होती है। इसका वैज्ञानिक नाम टैजेटस स्पीसीज है।

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खैर, यह तो है ज्ञान-विज्ञान की बात मगर छत्तीसगढ़ी लोकगीतों के पुरोधा स्व. गंगाराम शिवहरे के गीत ‘ससुराल गेंदा फूल’ के अर्थ तक पहुंचना है तो गेंदे की इस विशेषता का ज्ञान होना जरूरी है। लोक साहित्य में ऐसी वैज्ञानिक उपमाएं गढ़ना ही स्व. गंगाराम शिवहरे को महान बनाती है। उनके गीत ‘ससुराल गेंदा फूल’ को आपने फिल्म देहली-6 में सुना होगा। गीत के माध्यम में स्व. सीताराम शिवहरे ने एक लड़की के लिए ससुराल के महत्व को पहचानने की सीख दी है। ससुराल में हर व्यक्ति का अपना अलग अस्तित्व होता है, अलग मिजाज होता है और हर व्यक्ति घर आई बहू से अलग तवज्जो चाहता है। चाहे वह ससुर हो, मां हो, देवर हो या ननद। गीत में गंगाराम शिवहरे की मौलिक उपमा इतनी पसंद की गई कि ‘ससुराल गेंदा फूल’ के नाम से एक टीवी सीरियल भी बन गया। 

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रायपुर के तेलीबांधा के रहने वाले गंगाराम शिवहरे को गंगाराम सख्त के नाम से भी जाना जाता है। वह लोकप्रिय लोक-गीतकार थे। उन्होंने सामयिक विषयों पर ऐसे विचारपरक गीत लिखे हैं जो मानस पटल पर अमिट छाप छोड़ते हैं। गंगाराम शिवहरे उस समय चर्चा में आए जब विख्यात नाटककार हबीब तनवीर ने अपने लोकप्रिय नाटक ‘चरणदास चोर’ में उनके लिखे तीन गीत शामिल किए। इनमें ‘चोला माटी का राम’ जिसे हबीब की बेटी नगीन तनवीर ने गाया था, बेहद पसंद किया गया। बाद में आमिर खान ने बेहद चर्चित फिल्म ‘पीपली लाइव’ में इस गीत को शामिल किया था।

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ऐसी महान रचनाएं गढ़ने वाले गंगाराम शिवहरे फक्कड़ किस्म के इंसान थे, और हमेशा मुफलिस हालात में रहे। आज वह हमारे बीच नहीं हैं, छत्तीसगढ़ी लोककला में उनके चेले आज भी अपने गुरु का स्मरण करते हैं। उनके शिष्यों में रमा जोशी, श्रीराम दयाराम, श्रीप्रसाद वाजपेयी और अंतरराष्ट्रीय पंथी नृतक देवदास बंजारे का नाम प्रमुख है। 
आइये आप भी रस लीजिये उनके दो गीतों काः-
(1)
सैंया छेड़ देवे
ननद चुटकी लेवे
ससुराल गेंदा फूल….
सास गारी देवे
देवरानी समझा लेवे
ससुराल गेंदा फूल..
छोड़ा बाबुल का अंगना
भावे डेरा पिया को हो
सास गारी देवे…
सैंया है व्यापारी 
चले रे परदेस
सूरतिया निहारू
जियरा भारी होवे
ससुराल गेंदा फूल…
बुशर्ट पहनिन
खाइके बीड़ा पान
पूरे रायपुर से अलग है
सैंयाजी की शान
ससुराल गेंदा फूल…।
फिल्म-दिल्ली-6
(2)
चोला माटी का राम
इकर का भरोसा
द्रोण जैसे गुरु चले गए
करण जैसे दानी सांगी..
बाली जैसे बीर चले गए
रावण जैसे अभिमानी
चोला माटी का राम…
कोनो रईस न
कोना रहबे बहिया
हो सब का पारीख
एक दिन आई सब पे पारी
काल का नालो
छोड़े नाही
राजा, रंक, भिखारी
चोला माटी का राम…
भव से पार लगो परहे
हरी का नाम सुमरले
सांगी हर का नाम सुमरले    
ये दुनिया माया की रे पगला
जीवन मुक्ति कर ले
चोला माटी का राम..
फिल्म-पीपली लाइव

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