सोम साहू
बजा कहे जिसे आलम उसे बजा समझो
जबान-ए-खल्क को नक्कारा-ए-खुदा समझो
महान शायर शाकिर इब्राहीम जौक ने यह शेर उस दौर में कहा था, जब हमारे देश में आधुनिक लोकतंत्र की परिकल्पना भी नहीं की गई थी। बजा यानी सही, आलम का मतलब दुनिया, जबान-ए-खल्क यानी जनता की आवाज, नक्कारा-ए-खुदा का अर्थ होता है ईश्वर का आदेश। यानी लोकतंत्र में बहुमत की राय को ही ईश्वर का आदेश माना जाता है।
उस्ताद जौक के इस शेर के ठीक 100 साल बाद स्वतंत्र भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था का शुभारंभ हुआ। 'एक व्यक्ति, एक वोट' के अधिकार ने लोकतंत्र में हर भारतीय को समान महत्व और भागीदारी का समान अवसर प्रदान किया है। इसीलिए हमारा संवैधानिक दायित्व बनता है कि हम अपने नगर, प्रदेश और देश की सरकार के गठन में अपनी राय अपने वोट के रूप मे दें। यदि सटीक राय नहीं बना पा रहे हैं तो अब नोटा का अधिकार भी आपके पास है।
28 नवंबर को मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होने जा रहा है। एमपी के समाजबंधु संकल्प लें कि वोट देना इस दिन का सबसे जरूरी काम है। अब पहले की तरह मतदान केंद्र दूर-दूर स्थित नहीं होते। आपका मतदान केंद्र आपके घर के पास ही वॉकिंग डिस्टेंस पर है।
यदि आपको अपना मतदान केंद्र नहीं मालूम तो 51969 नंबर पर EPIC नंबर (EPIC : Electoral Photo Identity Card, यह नंबर आपके वोटर आय डी कार्ड पर अंकित होता हैं) को *MPEPICEPIC Number* टाईप कर एसएमएस करें। इसके जवाब में आपके मोबाइल पर दो एसएमएस आएंगे। एक एसएमएस में आपका विधानसभा क्षेत्र क्रमांक, बूथ क्रमांक, कमरा नंबर, क्षेत्र का नाम एवं मतदाता का नाम आदि जानकारियां होंगी, दूसरे एसएमएस में मतदान केंद्र तक पहुचंने के रास्ते की लिंक होगा
अब सबसे बड़ा सवाल, कि हम वोट किसे दें? सटीक निर्णय पर पहुंचने के लिए कुछ अहम बातों पर विचार करना जरूरी है, मसलन आपके लोकल प्रत्याशी, मौजूदा विधायक के कार्य, आपके क्षेत्र की जमीनी हकीकत, मुख्यमंत्री पद के दावेदार, और सबसे अंत में राजनीतिक दल।
आपको वोट देने से पहले लोकल प्रत्याशियों की पूरी जानकारी होनी चाहिए। उनकी शैक्षणिक योग्यता, करियर, आपराधिक पृष्ठभूमि, राजनीतिक बैकग्राउंड। ये सारी जानकारियां आपको नेता एप से मिल सकती हैं। गूगल सर्च का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।
अपने विधायक की परफार्मेस जानने के लिए आप एमपी लैड की वेबसाइट पर जा सकते हैं। एमपी लैड सांसदों व विधायकों को मिलने वाली वह सालाना निधि होती है जो उसे अपने क्षेत्र में विकास कराने के लिए मिलती है। लेकिन अफसोस, कई जनप्रतिनिधि ऐसे भी हैं जो इस निधि का प्रयोग भी नहीं कर पाए हैं।
सबसे महत्वपूर्ण चीज है आपके अपने क्षेत्र की जमीनी हकीकत। आप देखिये कि आपके क्षेत्र में प्रशासनिक व्यवस्थाएं कैसी चल रही हैं। अस्पतालों और स्कूलों की स्थिति, सार्वजनिक पार्कों का रखरखाव, साफ-सफाई की हालत, क्षेत्र में समृद्धि और रोजगार की स्थिति।
यदि सीएम पद के दावेदारों में कोई मौजूदा मुख्यमंत्री है, तो उसकी सरकार की परफार्मेंस को जज करें। क्या उनके वादों और कामों में फर्क रहा? वह आम पब्लिक को कैसे डील करता है, उसकी छवि कैसी है, दृष्टिकोण क्या है। उसके पांच साल के कार्यकाल में विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश की स्थिति क्या है। इन तमाम बातों के लिए गूगल सर्च में दावेदारों से जुड़ी खबरों पर विचार करें।
इसके बाद राजनीतिक दल पर विचार करें। किस राजनीतिक दल में कितने अपराधी हैं, कितने पढ़ेलिखे लोग हैं। उसके मुद्दे क्या हैं. क्या शिक्षा, रोजगार, किसानों के हित में उसके पास ठोस नीतियां है, क्या विकास का कोई दृष्टिकोण है। या फिर वह सिर्फ इमोशन्स की बात करता है।
एक बात को लेकर सतर्क रहें। इन दिनों सभी राजनीतिक दलों के पास आईटी सेल हैं जो सोशल मीडिया तथा ऐसे अन्य मंचों पर अपने प्रचार और दूसरे के दुष्प्रचार में लगे हैं। लेकिन आपको उनसे प्रभावित नहीं होना चाहिए। अपने शहर, समाज, परिवार और स्वयं अपनी स्थिति के बारे पर गौर करें, और फिर अपने वोट का निर्णय करें। आपके वोट का निर्णय दरअसल आपके अपने जीवन और भविष्य को लेकर किया गया एक बड़ा फैसला है, और यह फैसला आपसे बेहतर कोई नहीं कर सकता।
समाचार
आज ही तय कीजिये अपना भविष्य….फैसले से पहले इतना सोचना जरूरी
- by admin
- October 29, 2016
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- Less than a minute
- 9 years ago








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