January 11, 2026
शिवहरे वाणी, D-30, न्यू आगरा, आगरा-282005 [भारत]
समाचार

बेटे के सही दाम नहीं मिले तो फोन पर तोड़ दिया रिश्ता…ऑडियो टेप वायरल

शिवहरे वाणी नेटवर्क
उज्जैन।
दहेज एक ऐसी बुराई है जो हमें अपने बुजुर्गों से या कहें कि पुरानी पीढ़ी से विरासत में मिली हैं। लेकिन, अज्ञानता और अशिक्षा के अंधे युग में पनपी यह कुप्रथा आज के तथाकथित आधुनिक युग में भी अपनी जड़ें गहराई से जमाए हुए है। इससे भी अधिक निराशाजनक पहलू यह है कि आर्थिक रूप से संपन्न परिवारों में भी कन्या पक्ष से दहेज की मांग की जाती है, जबकि उनके ऊपर सामाजिक दायित्व है कि वे दहेज-रहित विवाह कर समाज में एक आदर्श प्रस्तुत करें। दहेज को लेकर ऐसी स्थिति लगभग हर समाज में है, कलचुरी समाज में भी।
दहेज का एक झकझोर देने वाला मामला उज्जैन में सामने आया है। यहां एक ऑडियो टेप वायरल हुआ है जिसमें दहेज की मांग कर रहे वर के पिता और दया की याचना करते वधु के पिता के बीच मोबाइल पर हुई बातचीत का रिकार्ड है। करीब दस मिनट के इस टेप में वर के पिता इस बात पर अपनी खिन्नत व्यक्त कर रहे है कि उनके कीमती इकलौते बेटे के सही दाम नहीं लग पाए हैं, वह वधु के पिता के सामने साफ तौर पर 40-50 लाख रुपये की मांग रखकर शादी तोड़ने की बात कह रहे हैं। लड़की का पिता रहम की याचना कर रहा है, एक बार बैठकर बात करने का अवसर मांग रहा है लेकिन लड़के के पिता उनकी एक बात सुनने को तैयार नहीं है। तुर्रा दे रहे हैं कि मैं दो-दो बेटियों की शादी कर चुका हूं। 
इस पूरी बातचीत से यही लगता है कि वर के पिता ने अपनी दो बेटियों की शादी में अच्छा-खासा दहेज दिया, और शायद वह बेटे की शादी में इतना ही दहेज पाकर उस नुकसान की भरपाई करना चाहते हैं। वह कहते हैं कि डेढ़-दो लाख मे हमारा क्या होगा, हमारे यहां दावत का खर्चा ही 15 लाख रुपये हो जाता है। बातचीत एक दुखद अंत पर समाप्त होती है, और लड़की का पिता याचना करता रह जाता है। टेप में दहेज की मांग करने वाला लड़के का पिता जायसवाल समाज का युवा कार्यकर्ता बताया जा रहा है जो महाकाल थाना क्षेत्र में एक होटल का मालिक है और लकड़ी का व्यापार भी है। बताया गया है कि इसी माह यानी दिसंबर वह महामंडलेश्वरजी के द्वारा भागवत भी कराने जा रहा है।
दहेज का लालच एक साधन-संपन्न व्यक्ति को इंसान के तौर पर कितना गिरा देता है, इसी की एक बानगी है यह ऑडियो टेप। इसीलिए दहेज को दानव कहा जाता है, इस दानव ने कितनी ही लड़कियों के सपनों को मारा है, और जानें कितनी लड़कियों को जान से मारा है।
सन 1961 में दहेज विरोधी कानून बना था, लेकिन क्या हुआ इस कानून का? 50 सालों के बाद आज भी शादी के मामले में दहेज न मिलने पर सौदा यानी रिश्ता कैंसल होने का फार्मूला चल रहा है। वैसे सच तो यही है कि इस तरह के रिश्ते का टूट जाना ही लड़की और उसके माता-पिता के लिए बेहतर है, क्योंकि दहेज-लोलुपों के यहां बेटी की शादी के बाद और दुखद परिणाम सामने आते है। आए दिन होने वाली दहेज हत्यायें ऐसे ही रिश्तों की परिणति हैं। 
जरूरत समाज में दहेज के खिलाफ एक जागृति पैदा करने की है, जिसमें दहेज मांगने वालों व देने वालों, दोनों को गलत समझा जाए। कलचुरी समाज से इसकी उम्मीद की जा सकती है, क्योंकि इस समाज मे कई सुधारवादी आंदोलन चल रहे हैं। कुरीतियों और अंधविश्वासों के खिलाफ व्हाट्सएप (सामाजिक कुरीतियां मिटाओ ग्रुप, कलार समाज की बेटियां ग्रुप) और फेसबुक जैसे प्लेटफार्म्स पर बकायदा लोग एक-दूसरे से जुड़कर आगे बढ़ रहे हैं। मृत्यु-भोज उन्मूलन, बालिका शिक्षा, कन्या-भ्रूण हत्या पर रोक के लिए समाज में जागृति आई है। इसीलिए, भरोसा है कि दहेज प्रथा के खिलाफ भी मजबूती से खड़ा होने वालों में कलचुरी समाज सबसे आगे होगा। बस एक पहल की दरकार है., कौन करेगा? 
 

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