January 11, 2026
शिवहरे वाणी, D-30, न्यू आगरा, आगरा-282005 [भारत]
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12वीं की परीक्षा से पहले जेईई मेन्स में 99.67 परसेंटाइल…पीयूष शिवहरे का सक्सेस मंत्रा..Say No To Smartphone

जेईई मेन्स 2020 में 99.67 परसेंटाइल…मोदीजी के टिप्स के बाद पीयूष शिवहरे का सक्सेस मंत्रा..Say No To Smartphone
शिवहरे वाणी नेटवर्क
मुरैना।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों को सफलता के कई मंत्र दिए। ये वही टिप्स हैं जो हर गुरु अपने विद्यार्थी को देता है और जिसकी अपेक्षा अभिभावक अपने बच्चे से करते हैं। कुछ बच्चे समझाने के बाद भी नहीं समझते, और कुछ ऐसे होनहार होते हैं जो स्वयं ही जीवन में इन मंत्रों को उतार लेते हैं। मुरैना के पीयूष शिवहरे भी ऐसे ही स्वप्रेरित छात्र हैं, जो अपनी लगन, संयम और त्याग के बल पर सफलता की इबारत लिख रहे हैं। हाईस्कूल में मुरैना टॉप करने वाले पीयूष ने इंटरमीडियेट की परीक्षा देने से पहले ही जेईई मेन्स 2020 की परीक्षा में शानदार 99.67 परसेंटाइल हासिल कर एनआईटी जैसे संस्थानों में अपना एडमिशन पक्का कर लिया। हालांकि उसकी नजर जेईई एडवांस परीक्षा पर है जो आईआईटी में दाखिला लेने के उसके और उसके परिवार के सपने को साकार करेगा। 
पीयूष की सफलता की खास बात यह है कि उसने घर से दूर रहकर बहुत सीमित संसाधनों में (त्याग), स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के आकर्षण में न पड़ते हुए (संयम) पूरा फोकस अपनी पढ़ाई पर किया (लगन), और अभिभावकों को शानदार रिजल्ट देकर उन्हें गर्व का अहसास कराया। 
मुरैना के महावीरनगर निवासी पीयूष शिवहरे के पिता रविंद्र शिवहरे एक वाइन शॉप में नौकरी करते हैं। परिवार की आर्थिक हैसियत ऐसी नहीं कि बेटे को पढ़ने के लिए बाहर भेज सकें। फिर भी 2018 में पीयूष ने जब सीबीएसई की दसवीं परीक्षा में मुरैना टॉप किया तो परिवार ने उसे कोटा भेजने की ठान ली। कोटा की प्रतिष्ठित कोचिंग एलन इंस्टीट्यूट में पीयूष का दाखिला कराया, कोटा में उसे पीजी रूम दिलाया। इतना खर्चा मैनेज करने के लिए घर के खर्चों में कटौती की। 
उधर पीयूष भी जैसे परिवार के इस त्याग को व्यर्थ नहीं होने देने की ठानकर बैठा था। पीयूष की मम्मी श्रीमती रुचि शिवहरे बताती हैं कि हमारे बहुत कहने के बावजूद पीयूष ने कभी स्मार्टफोन नहीं लिया। कोटा में उसके पास केवल बेसिक फोन है जिसमें वह हर महीने केवल 35 रुपये का रिचार्ज कराता है , वो भी इसलिए कि घर में बात करनी होती हो तो मम्मी के मोबाइल पर मिस कॉल कर सके।
कोटा में रहते हुए पीयूष ने स्वयं ही अपना अनुशासन तैयार किया और सख्ती से उसका अनुपालन किया। वह दिन में छह घंटे सोना और डेढ़ घंटा स्नान-भोजन को छोड़कर पूरा समय कोचिंग क्लास और पीजी रूम में पढ़ाई करते हुए बिताता था। पीयूष का कहना है कि कोटा में या कहीं भी कोई कोचिंग क्लास केवल उन्हीं बच्चों के लिए फायदेमंद हो सकती है जो वास्तव में उसका फायदा लेना चाहते हैं। मैं जानता था कि कोटा में मुझे महंगी कोचिंग कराने के लिए परिवार ने कितना त्याग किया है, इसीलिए मैंने कोशिश की कि मेरा एक भी मिनट बर्बाद न हो। जब कभी पढ़ाई करते-करते दिमाग बोझिल होता तो पीयूष दोस्तों के साथ तफरीह करने के बजाय मुरलीधर महाराज के भजन सुनकर खुद को रिलेक्स करता और फिर पढ़ाई में जुट जाता। 
रुचि शिवहरे ने बताया कि कोटा में पीयूष को शुरू-शुरू में अकेले रहने में परेशानी होती थी तो अक्सर वह खुद छोटे बेटे माधव को लेकर कोटा पहुंच जाती थीं और दस-पंद्रह दिन रहकर पीयूष की देखभाल करती रहीं। जेईई मेन्स की तैयारी के लिए पूरे दो महीने कोटा में रहीं। इसके चलते वह पांच साल के बेटे माधव का फर्स्ट क्लास में एडमिशन भी नहीं करा सकीं। रुचि का कहना है कि अब इस साल माधव का एडमिशन कराएंगी। वहीं बेटी अनुष्का दसवीं की बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रही है, लेकिन भैय्या की कामयाबी के लिए उसने भी सपोर्ट किया और मम्मी के नहीं होने पर पढ़ाई के साथ-साथ घर के काम भी संभाले।
आज पीयूष के रिजल्ट ने पूरे परिवार को दूसरी बार उस पर नाज करने का मौका दिया है। इससे पहले पीयूष शिवहरे को दसवीं की बोर्ड परीक्षा में 97.6 प्रतिशत अंक लेकर मुरैना जिले में टॉप किया था।  पीयूष अपने मामा दिलीप कुमार शिवहरे को मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत मानता है। दिलीप कुमार शिवहरे अध्यापक हैं। पीयूष के मुताबिक, मामा ने ही उसे समय-समय पर गाइड किया और प्रेरित किया। मामा के सहयोग से ही कोटा जा सका। 
 

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