शिवहरे वाणी नेटवर्क
पाली
हमारी संस्कृति, परंपरा और उच्च जीवन-आदर्श ही हमारे गणतंत्र की महानता का आधार है। हरेक नागरिक जो करुणा का भाव रखता है, मानव मूल्यों के प्रति संवेदनशील है, वह हमारे गणतंत्र का सच्चा रक्षक है। आज गणतंत्र दिवस के अवसर पर आइये मिलते हैं कलचुरी समाज के ऐसे ही एक शख्स से, जो पिछले 32 वर्षों से लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कर रहा है। यही नहीं, जरूरतमंदों के लिए रक्तदान और गरीब गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण के लिए उनके द्वारा किया गया योगदान भी सराहनीय है।

ये हैं राजस्थान में पाली जिले के रानीशहर कसबे में रहने वाले डालचंद मेवाड़ा। डालचंद मेवाड़ा 1988 से दिन-रात मानव सेवा में लगे हुए हैं। जब भी किसी दुःखद हादसे की जानकारी मिलती है, मेवाड़ाजी सहायता के लिए तत्काल पहुंचना अपना धर्म समझते हैं। एक मानव सेवी के रूप में उनकी इतनी ख्याति हो गई है कि अब प्रशासन भी ऐसे मामलों में मेवाड़ाजी की सहायता लेता है। कहीं कोई अज्ञात शव किसी भी हालत में पुलिस को मिलता है, और उसकी शिनाख्त नहीं हो पाती है, तो मेवाड़ाजी की जिम्मेदारी होती है कि वे उसका अंतिम संस्कार पूर्ण विधि-विधान से कराएं। इस कार्य के लिए उन्हें राजस्थान सरकार की ओर से सम्मानित भी किया जा चुका है।

शिवहरे वाणी से बातचीत में डालचंद मेवाड़ा ने बताया कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ने के बाद 1988 से इस कार्य में लगे हुए हैं। उन्होंने बताया कि वह संघ के शिविर में जाते थे और वहां बौद्धिक प्रचारकों के विचारों ने उन्हें इस कार्य के लिए प्रेरित किया। सबसे पहले जीआरपी ने एक लावारिस लाश अंतिम संस्कार के लिए उन्हें सौंपी थी। उसके बाद से सेवा का यह सिलसिला शुरू हो गया। इस कार्य में सहायता के लिए उन्होंने हिंदू सेवा मंडल नाम से एक संस्था गठित की है, जिसके सभी सदस्य मेवाड़ाजी के नेतृत्व और निर्देश पर एक टीम के तरह काम करते हैं।

मेवाड़ाजी बताते हैं कि पहले यह सेवा उनके रानीशहर तक सीमित थी, लेकिन अब आसपास के कसबों और पाली जिला मुख्यालय भी कहीं इस तरह की कोई घटना सामने आती है, प्रशासन की ओर से उन्हें इससे अवगत कराया जाता है।

उन्होंने बताया कि एक शव के दाह संस्कार में करीब 5000 हजार रुपये का खर्चा आता है। अब प्रत्येक अज्ञात शव के अंतिम संस्कार के लिए प्रताप बाजार के लॉयन्स शवदाह गृह ट्रस्ट की ओर से 2100 रुपये दिए जाते हैं। आमतौर से इस धनराशि से लकड़ी ही आ पाती है। कफन, घी और अन्य चीजों का इंतेजाम वह अपने ही संसाधनों से करते हैं।

रानीशहर में मेवाड़ा ऑफसेट के नाम से प्रिंटिंग प्रेस चलाने वाले मेवाड़ाजी अब तक 13 बार रक्तदान कर चुके हैं। नगर के प्रताप बाजार शवदाहगृह का विकास और सौंदर्यीकरण में भी उनका असाधारण योगदान है। इसके लिए उन्होंने लोगों को प्रेरित किया जिसके बाद शवदाहगृह पर चारदीवारी और तीन कमरों का निर्माण, पौधारोपण, टिनशेड आदि के कार्य भी उन्हीं की पहल, प्रयास और प्रेरणा में संभव हुए।

डालचंद मेवाड़ा राजनीति में भी खासी पकड़ रखते हैं। वह तीन बार नगरपालिका पार्षद रहे हैं। वर्तमान में वह भाजपा की रानी शहर मंडल इकाई के उपाध्यक्ष हैं। साथ ही भाजपा बूथ शक्ति केंद्र के प्रभारी का दायित्व भी संभाल रहे हैं। वह रेलवे बोर्ड अजमेर मंडल के सलाहकार भी हैं।

रानीशहर की बजरंग कालोनी में रह रहे डालचंद मेवाड़ा का पूरा परिवार बहुत धार्मिक है। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती शारदा देवी एक धर्मनिष्ट महिला हैं, और पति को मानवसेवा के लिए प्रेरित करती हैं। उनके दो पुत्र हैं, बड़ा बेटा ऋषि इंटीरियर डिजाइनिंग की पढ़ाई कर रहा है, जबकि छोटा बेटी संदीप अभी इंटरमीडियेट में है।

मेवाड़ा ने शिवहरे वाणी से बातचीत में कहा कि वह मन की शांति के लिए सेवा कार्यों में लगे हुए हैं। कई बार ऐसे शवों का अंतिम संस्कार भी किया जो शिनाख्ती के इंतजार में मोर्चरी में सड़ गया और बुरी तरह बदबू दे रहा था। मेवाड़ाजी की टीम के सदस्य भी बदबू की परवाह न करते हुए बाकायदा लाश की अर्थी को कंधा देते हैं। कपाल क्रिया भी की जाती है।

आज गणतंत्र दिवस है। यूं तो हमारे यहां गणतंत्र के तीन संस्थागत रक्षक हैं-विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका। चौथा रक्षक प्रेस को माना जाता है। लेकिन पांचवां और अंतिम रक्षक सबसे खास है, और वह हैं आप और हम, एक आम नागरिक। डालचंद मेवाड़ा भी एक ऐसे आम आदमी हैं जो अपने कार्यों से गणतंत्र को अक्षुण्ण बनाए बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी उठा रहे है। यह कार्य वही व्यक्ति कर सकता है मानव मूल्यों के प्रति संवेदनशील हो, जो कि हमारे संविधान की मूल आत्मा है । 








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