by Som Sahu June 28, 2017 घटनाक्रम 306
ग्राम प्रधान की शह पर लेखपाल ने कानूनी दस्तावेजों के उलट दी रिपोर्ट
केयरटेकर श्री दयाशंकर शिवहरे ने शिवहरे वाणी को बताया पूरा मामला
शिवहरे वाणी नेटवर्क
आगरा।
बटेश्वर स्थित शिवहरे धर्मशाला पर अवैध कब्जे की साजिश रची जा रही है। धर्मशाला के केयरटेकर ने शिवहरे वाणी से संपर्क कर इस बात की जानकारी दी है। साथ ही समाज के बंधुओं से धर्मशाला पर कब्जे की साजिश को नाकाम करने के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ने का आह्वान किया है।
इस धर्मशाला के केयरटेकर श्री दयाशंकर शिवहरे उर्फ दयालु निवासी बटेश्वर ने बताया है कि मौजूदा ग्राम प्रधान गुड्डा अब इस जगह को ग्राम सभा की जमीन बताकर कब्जा करने के प्रयास में है। प्रधान ने अपने साथियों के साथ मिलकर योजना तैयार कर ली है। योजना के मुताबिक ही, लेखपाल किशनलाल से झूठी रिपोर्ट लिखवा ली गई है कि यह जमीन सर्वसमाज की सामाजिक जमीन है। जबकि, इस जगह को वहां वैश्यों की धर्मशाला के नाम से जाना जाता है। श्री दयाशंकर शिवहरे आज आगरा आए और जमीन के कानूनी वारिस श्री अविरल गुप्ता से मिले। साथ ही शिवहरे वाणी को भी इसकी जानकारी दी।
धर्मशाली की इस जगह के स्वामित्व विलेख के मुताबिक, श्री अविरल गुप्ता ही इसके वास्तविक वारिस हैं जो अपने पूर्वजों की इच्छा का सम्मान रखते हुए इसे पक्के तौर पर धर्मशाला के लिए समर्पित करना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि इस जगह पर शिवहरे समाज की एक धर्मशाला बने, जहां दूरदराज से आने वाले शिवहरे बंधुओं को प्राथमिकता दी जाए। फिलहाल चूंकि बटेश्वर में केयरटेकर श्री दयाशंकर शिवहरे का एकमात्र शिवहरे परिवार है, लिहाजा कब्जे की स्थिति में प्रतिवाद करने की उनकी भी एक सीमा है। लिहाजा वे चाहते हैं कि इस कार्य मं आगरा का शिवहरे समाज उनका सहयोग करे।
बटेश्वर में यह जगह मुख्य बाजार स्थित स्टेट बैंक शाखा के ठीक सामने है, और काफी समय बंद पड़े होने के कारण खंडहर हाल हो गई है। यह जगह स्व. श्री मुरलीधर गुप्ता ने वर्ष 1910 में खरीदी थी, जिसका बैनामा आज भी श्री अविरल गुप्ता के पास है जो उस समय सरकारी दस्तावेजों के लिए प्रचलित फारसी भाषा में हैं। स्व. श्री मुरलीधर गुप्ता ने उस समय यह भूमि कारोबार के लिहाज से खरीदी थी। लेकिन बाद में उनके उत्तराधिकारी स्व. श्री रामस्वरूप गुप्ता ने इसे धर्मशाला के रूप मे विकसित करने की इच्छा से अपने कारोबार को वहां से हटा लिया। कुछ समय तक तो इस जगह का प्रयोग धर्मशाला के रूप में ही हुआ, जिससे यह जगह वैश्यों की धर्मशाला के रूप में जानी जाने लगी। नाई की मंडी मंडी निवासी स्व. श्री रामस्वरूप गुप्ता चाहते थे कि इसे एक बड़ी धर्मशाला के रूप में विकसित किया जाए।
लेकिन इसी दौरान करीब 1978 में इस जगह पर कब्जे के प्रयास शुरू हो गए। बटेश्वर के तत्कालीन ग्राम प्रधान ने कब्जा करने की नीयत से इस जगह के एक कोने में दुकान का निर्माण शुरू करा दिया। जब इसकी सूचना श्री रामस्वरूप गुप्ता को हुई तो उन्होंने जोरदार आपत्ति जाहिर की। चूंकि स्वामित्व संबंधी विलेख उनके पास थे, और वही कानूनी वारिस भी थे, लिहाजा प्रशासन की सहायता से उस समय कब्जे को तत्काल रुकवा दिया गया। लेकिन इसके कुछ सालों बाद ही उनका निधन हो गया। तब से यह जगह बंद प़ड़ी है, और अब काफी खस्ताहाल हो चुकीहै। हालांकि बटेश्वर निवासी दयाशंकर शिवहरे उर्फ दयालु अब भी इसके केयरटेकर हैं।
करीब तीन साल पहले स्व. रामस्वरूप गुप्ता के पुत्र श्री आनंद गुप्ता ने जगह को धर्मशाला के रूप में विकसित कर अपने पिता के सपनों को पूरा करने का बीड़ा उठाय़ाा। इसके तहत सबसे पहले उन्होंने वहां एक बड़ा गेट स्थापित किया। योजना इसका मौजूदा ढांचा तुड़वा कर नई संरचना खड़ी करने की थी, कि दुर्भाग्य से उनका आकस्मिक धन हो गया। धर्मशाला को विकसित करने की योजना फिर खटाई में पड़ गई।
बटेश्वर धार्मिक पर्यटन के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण स्थल है। यहां यमुना तट पर सैक़ड़ों की संख्या में मंदिर हैं जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहता है। हर साल नवंबर माह में यहां राष्ट्रीय स्तर का पशु मेला लगता है। सरकार की योजना बटेश्वर को उसके महत्व के अनुसार ही एक अहम धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की है। इस पर तेजी से काम चल रहा है। ऐसे में यदि इस जगह शिवहरे समाज की एक धर्मशाला विकसित हुई तो आगरा, फिरोजाबाद, इटावा ही नहीं, बल्कि दूरदराज के शिवहरे बंधुओं के लिए भी बड़ी सहूलियत होगी।









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