January 12, 2026
शिवहरे वाणी, D-30, न्यू आगरा, आगरा-282005 [भारत]
समाचार

थैंक्यु अतुल भैया! आपके गिफ्ट किये कपड़े पहनकर जा रही हूं..!

by Som Sahu November 04, 2017  घटनाक्रम 481

ट्रांसयमुना के अस्पतालों में भर्ती बच्चों व परिजनों ने लौटते हुए जताया अतुल शिवहरे का आभार

शिवहरे वाणी नेटवर्क

आगरा।

ताजमहल जैसी खूबसूरत इमारत को जिस प्रेम की निशानी माना जाता है, तो वो प्रेम खुद कितना खूबसूरत होता होगा, आप कल्पना ही कर सकते हैं। लेकिन, यह आपकी कल्पना से भी सुंदर होता है, आइये बताते हैं आपको। यमुना एक्सप्रेसवे पर बीते रोज शुक्रवार की सुबह बस पलटने से घायल हुए हिमाचल के बच्चों में 14 साल की जागृति भी थी, जो ट्रांसयमुना के आकाश अस्पताल में पांच अन्य बच्चों के साथ भर्ती थी। आज शनिवार शाम वह अपने पेरेंट्स के साथ मंडी लौट गई। जाते हुए वह दयाल होटल के रिसेप्शन पर एक पत्र छोड़ गई, जिसमें उसमें सिर्फ लिखा था- थैंक्यु अतुल भैया।

बेहद भावुक कर देने वाले तीन शब्दों का यह पत्र दरअसल आभारकी अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि प्रेमऔर उससे जन्म ले रहे भाई-बहनके एक नये रिश्ते की पहली पायदान है। शिवहरे वाणी के उपसंपादक श्री अतुल शिवहरे ने घायल बच्चों के परिजनों और स्कूल के स्टाफ को ठहराने के लिए कल शाम को दयाल होटल बुक कर लिया था। घायल बच्चे दयाल होटल के पास ही आकाश अस्पताल और कृष्णा अस्पताल में भर्ती थे। आकाश अस्पताल में जागृति समेत छह घायल बच्चे थे, जबकि कृष्णा अस्पताल में सात लोग थे जिनमें बस का सहायक चालक और एक टीचर भी थीं। कल रात से ही पेरेंट्स भी आने शुरू हो गए। जागृति के पेरेंट्स भी आए थे और उन्होंने दयाल होटल में ही रात बिताई।

आज सुबह दोनों अस्पतालों में भर्ती बच्चों को खून से सने अपने कपड़ों से असहजता महसूस हो रही थी, लेकिन मुश्किल यह थी कि उनके बैगों का पता नहीं था। अतुल शिवहरे अस्पताल गए तो उन्हे इसकी जानकारी हुई। सभी बच्चों के साइज का अंदाजा कर वह बाजार से कपड़े लेकर आए जो अस्पताल के कर्मचारियों की मदद से बच्चों को कपड़े पहनाए गए।

दोपहर को जागृति के पेरेंट्स उसे लेकर मंडी जाने की तैयारी कर रहे थे। दयाल होटल के रिसेप्शन पर उन्होंने बिल बनाने को कहा, लेकिन वह चौंक गए जब उन्हें पता चला कि उनका बिल पेड हो चुका है। तब जागृति के पिता ने रिसेप्शन से नंबर लेकर श्री अतुल शिवहरे को फोन किया और आग्रह किया कि बिल हमें देनें दें। लेकिन, कोई फायदा नहीं था। इसके कुछ ही देर बाद जागृति ने भी अतुल शिवहरे को फोन कर कहा, ‘भैया हम जा रहे हैं, और मैं आपके दिये कपड़े पहनी हूं। आप मंडी जरूर आइयेगा, मेरे घर।

अतुल दिनभर दोनों अस्पतालों में बच्चों को मंडी भेजने का इंतजाम करने में व्यस्त थे। उनके आग्रह पर पुलिस क्षेत्राधिकारी ने अपने आला अफसरों से बात की, और बच्चों के लिए एंबुलेंस का इंतजाम कराया गया। एंबुलेंस बच्चों को चंडीगढ़ पीजीआई तक के लिए रैफर की गई। क्योंकि इनके चालकों को पहाड़ों पर गाड़ी चलाने का अनुभव नहीं है। बच्चे और उनके परिजन अतुल शिवहरे और सहायता करने वाले अन्य लोगों को हाथ हिलाते हुए रवाना हो गए, जिन बच्चों के हाथ चोटिल थे, उनकी मुस्कराहट ने पूरा काम कर दिया।

बच्चों और पेरेंट्स को विदा कर श्री अतुल शिवहरे होटल दयाल पहुंचे, तो रिसेप्शनिस्ट ने उन्हें एक चिट्ठी थमाई जो जागृति उनके लिए रख गई थी। उस पर लिखा था- थैंक्यु अतुल भैया इन तीन शब्दों के नीचे एक राखी बनी थी। इस बीच रिसेप्शनिस्ट उठा और होटल में ही बने मंदिर में रखे 151 रुपये लेकर आया, और उन्हे देते हुए बताया कि एक बच्चे के पेरेंट्स भगवान के मंदिर में 151 रुपये रख गए थे, यह कहते हुए कि इन्हें अतुल भैया को दे देना।यह जानकर अतुल की आंखे भर आईं।

यही अंतर होता है आगरा में आकर मोहब्बत की निशानी देखने और यहां के लोगों के जीवंत प्रेम के अहसास करने के बीच। ताजमहल है तो पत्थर ही, वह आपको स्पंदित कर सकता है मगर आप उसे नहीं कर सकते,.. लेकिन जीवंत प्रेम में यह स्पंदन दोतरफा होता है और इसीलिए अटूट रिश्तों में बंधने में देर नहीं लगती, जैसे अतुल और जागृति अब भाई-बहन बन गए हैं। हां, एक बात औरमंडी (हिमायल) के घायल बच्चों, उनके परिजनों और स्कूल स्टाफ ने पहली बार जाना कि शिवहरे भी कोई सरनेम होता है और वे इसे भूलेंगे नहीं।

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